Connect with us

भारत पर्व में प्रदर्शित होगी “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की झांकी…

उत्तराखंड

भारत पर्व में प्रदर्शित होगी “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की झांकी…

भारत पर्व के अवसर पर इस वर्ष उत्तराखण्ड राज्य की झांकी “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” थीम के अंतर्गत प्रदर्शित की जाएगी। यह जानकारी रक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय रंगशाला शिविर, नई दिल्ली में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान दी गई, जिसमें विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों ने अपनी-अपनी झांकियों के माध्यम से समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की।

भारत पर्व के आयोजन के तहत 26 से 31 जनवरी तक दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में उत्तराखण्ड की विकास यात्रा के दर्शन किए जा सकेंगे। “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” थीम आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप राज्य की सांस्कृतिक, आर्थिक एवं पारंपरिक आत्मनिर्भरता को दर्शाती है।

यह भी पढ़ें 👉  105 शिकायतों में से 78 जनसमस्याओं का मौके पर हुआ समाधान

सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक एवं झांकी के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने बताया कि झांकी के ट्रैक्टर सेक्शन में उत्तराखण्ड के पारंपरिक वाद्ययंत्र ढोल और रणसिंघा की आकर्षक तांबे की प्रतिकृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शिल्पी कारीगरों की कलात्मक दक्षता को दर्शाती हैं।

झांकी के ट्रेलर सेक्शन के प्रथम भाग में तांबे के मंजीरे की विशाल मूर्ति स्थापित की गई है, जो तांबे की शिल्प कला की बारीकियों को उजागर करती है। मध्य भाग में तांबे से बने पारंपरिक बर्तन—गागर, सुरही और कुण्डी—दिखाए गए हैं, जो उत्तराखण्ड के पारंपरिक घरेलू जीवन के अभिन्न अंग हैं। इसके नीचे साइड पैनलों पर पारंपरिक वाद्ययंत्र भोंकोर के चित्रण किए गए हैं, जो सांस्कृतिक कथा को और सशक्त बनाते हैं।

यह भी पढ़ें 👉  वंचित असहाय बालिका ही हमारे जीवन की वास्तविक नंदा-सुनंदा देवियांः डीएम

झांकी के अंतिम भाग में तांबे के कारीगर की सजीव और प्रभावशाली प्रतिमा दर्शाई गई है, जिसमें वह हाथ से तांबे के बर्तन बनाते हुए दिखाया गया है। कारीगर के चारों ओर सुसज्जित तांबे के बर्तन पीढ़ियों से चली आ रही शिल्प परंपरा, कौशल और श्रम की गरिमा को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करते हैं।

यह झांकी उत्तराखण्ड के शिल्पी समुदाय की कारीगरी, सांस्कृतिक योगदान, आर्थिक आत्मनिर्भरता, आजीविका, कौशल और परंपराओं को प्रभावी ढंग से दर्शाती है। चौहान ने कहा कि प्राचीन शिल्प कला के माध्यम से राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो आज भी समाज का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है।

यह भी पढ़ें 👉  डीएम को उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए जर्नलिस्ट यूनियन ने किया सम्मानित

उन्होंने बताया कि स्थानीय कारीगरों द्वारा पारंपरिक तकनीकों से निर्मित तांबे के बर्तन एवं उपकरण न केवल उत्कृष्ट शिल्प कौशल का उदाहरण हैं, बल्कि उत्तराखण्ड के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में भी इनका विशेष महत्व रहा है। यह प्राचीन शिल्प शिल्पी समुदाय के अनेक परिवारों के लिए आजीविका का सशक्त माध्यम है और उनकी सांस्कृतिक पहचान एवं विरासत को सशक्त रूप से प्रतिबिंबित करता है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

More in उत्तराखंड

उत्तराखंड

उत्तराखंड
Advertisement

ADVERTISEMENT VIDEO

ट्रेंडिंग खबरें

To Top